बाबा धाम देवघर महादेव प्रभु की वंदना

बाबा रावणेश्वर महादेव वंदना

जय-जय रावणेश्वर दाता,
जय शिव शंभु त्रिपुरारी।
भक्तों के संकट हरने वाले,
करुणा के तुम हो भंडारी॥

मस्तक पर चंद्र सुशोभित है,
जटाओं में गंगा बहती है।
डमरू की पावन ध्वनि सुनकर,
सारी सृष्टि नित झूमती है॥

हे नीलकंठ तुम, जग के स्वामी,
विष पीकर जग को तार दिया।
दीन-दुखी के हर संताप को,
अपने चरणों में धार लिया॥

बिल्वपत्र और जल की धारा,
तुमको अति प्रिय लगती है।
सच्चे मन से जो शीश नवाए,
उसकी नैया पार लगती है॥

हे रावणेश्वर महादेव!
मुझ पर अपनी कृपा बनाए रखना।
भक्ति, शक्ति और सद्बुद्धि का,
सदा अमृत बरसाए रखना॥

हर-हर महादेव की गूंज से,
जीवन मेरा पावन हो जाए।
तेरे चरणों की रज पाकर,
मन का अंधकार मिट जाए॥

शिव ही सत्य, शिव ही सुंदर,
शिव ही जीवन का आधार।
रावणेश्वर बाबा की महिमा,
गूँजे जग में अपरम्पार॥

हर-हर महादेव!
ॐ नमः शिवाय।

✍️ वंदना लेखक — प्रगति मिश्रा

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