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Showing posts from August, 2011

झाड़-फानूस के कमरों में

हाले दिल

think

और मैं जीता रहा

रीति बहुत विपरीत

कांच के टुकडे

बेटियाँ

प्रतीति

ये आंसू नहीं शबनम है

मैं चिराग हूँ

खूबसूरत ये जहाँ

ग़ज़ल

जुदाई

इन्तजार

hale dil

dosti

प्यारी शुरूवात

ek baat batu

dil ki bhawanye

मेरे दिल में दबे

yadd ghar ki

बच्चों कि जरूरत