हाले दिल


तेरे बारे जो सोचू.... तो महक ये उठती हैं
जाने हवाओ का तेरे तस्सवुर से रिश्ता क्या हैं

तू साथ हो तो लब जाने क्यों नहीं खुलते इसके
तुझे कहने को दिल जाने ये सोचता क्या हैं...

दर्द ग़म टूटे ख्वाब और चंद ख्वाहिशे अधूरी...
तू न हो तो जिंदगी इन लफ्जों के सिवा क्या हैं...


मैं जीता हूँ इस जहा सिर्फ उसका नजारा कर
जो शक्स पूछे तू मुझमे देखता क्या हैं...

औरो सा मुझे देखते तो..तू भी औरो से जुदा कहाँ
मेरी आरजू तू बताये ... मुझमे अलग सा क्या हैं

तू यार और कुछ न कर... ये मुश्किल फकत हल कर मेरी..
तुझसे जब नहीं बाकी... तेरी यादो से ये कुछ बाबस्ता क्या हैं...

हर एक से नजदीकी रखे... हम वो शख्स कुछ ठीक नहीं...
जाने क्या मतलब हो उसे... जाने वो तुझसे चाहता क्या हैं...

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