मैं चिराग हूँ
मैं बूंद हूँ सागर से टकराता हूँ
मैं लहर हूँ, किनारों को घबराता हूँ
मैं परिंदा हूँ बादलों को लटकता हूँ
मैं बिंदु हूँ सिंधु से डरता नहीं
दुआ करो अय हवाओं और फि़ज़ाओं, सलामत रहें
हिम्मत तेरी मज़बूत रहें जि़गर मेरा लोहा बन
सदियों से संघर्ष करता मैं, जलता हूँ मैं
एक छोटा सा चिराग हूँ
मुझे बुझाने के लिए अभी भी
आंधियों की कोशिश जारी है ।
मैं सदियों से डालता हूँ ।

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