think
कुछ न भाया निगाहों को इक उसे तकने के बाद
हर शख्स बेस्वाद लगा इन्हें उसे चखने के बाद
इश्क के बाज़ार का चलन दुनिया से जुदा तो नहीं
सौदा कीजिये यहाँ भी शख्स परखने के बाद
धुन में अपनी जिनसे अक्सर दूर चला जाता हु...
खूब याद आते हैं वो राह भटकने के बाद
जाम की कीमत हैं कि बस, होश तारी रहने के तक...
आब और मय एक ही हैं फिर होश बहकने के बाद
रिश्तो की गिरह को अपनी गांठो से बचाए रखना
कि कमजोर रहती हैं ये डोर उलझने के बाद
बड़ा ही शातिर किरायेदार ठहरा "आलोक" इश्क तो
जान भी मांगता हैं मुआ दिल में बसने के बाद
हर शख्स बेस्वाद लगा इन्हें उसे चखने के बाद
इश्क के बाज़ार का चलन दुनिया से जुदा तो नहीं
सौदा कीजिये यहाँ भी शख्स परखने के बाद
धुन में अपनी जिनसे अक्सर दूर चला जाता हु...
खूब याद आते हैं वो राह भटकने के बाद
जाम की कीमत हैं कि बस, होश तारी रहने के तक...
आब और मय एक ही हैं फिर होश बहकने के बाद
रिश्तो की गिरह को अपनी गांठो से बचाए रखना
कि कमजोर रहती हैं ये डोर उलझने के बाद
बड़ा ही शातिर किरायेदार ठहरा "आलोक" इश्क तो
जान भी मांगता हैं मुआ दिल में बसने के बाद

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