अनुरक्त-विरक्त यह जीवन भाग 2
अनुरक्त-विरक्त यह जीवन
अनुरक्त-विरक्त यह जीवन,
संघर्ष में रत सबकुछ है।
सुख-दुख के इस पथ पर चलना,
मानव का ही कर्तव्य है।
चाह सफलता को पाने की,
जीवन में हार न मानने की।
हर बाधा को पार करेंगे,
प्रतिज्ञा है आगे बढ़ जाने की।
चलो मेहनत से कुछ कर दिखलाएँ,
जीवन को चलो आगे बढ़ाएँ।
अंधकार चाहे कितना गहरा हो,
आशा के दीप नए जलाएँ।
हार नहीं मानें, हिम्मत न हारें,
संकल्पों को दृढ़ता से सँवारें।
काँटों भरे मार्गों पर भी,
मंज़िल की ओर कदम बढ़ाएँ।
मेहनत से सफर सफलता का करके मानें,
अपने सपनों को साकार बनाकर जानें।
पसीने की हर एक बूँद,
भाग्य का नया अध्याय लिख जाए।
गिरकर उठना ही जीवन है,
चलते रहना ही साधन है।
जो संघर्षों से नहीं डरते,
उनका ही उज्ज्वल कल होता है।
अनुरक्त-विरक्त यह जीवन,
संघर्ष में रत सबकुछ है।
मेहनत, साहस और विश्वास से,
सफलता का शिखर भी सुलभ है।
लेखक : प्रगति मिश्रा

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