शिव स्तुति
नमः शिवाय शान्तरूप, अनन्त ज्योति धाम। जिनकी जटा में बह रही, जीवनदायिनी गंगाधाम॥
न तुम आदि, न तुम अंत, न सीमा कोई जान। कण-कण में तुम व्याप्त हो, तुमसे ही पहचान॥
डमरू की ध्वनि से सृजित, यह सारा ब्रह्मांड। ताण्डव की गति में छिपा, सृष्टि-विनाश का छंद॥
नीलकण्ठ करुणामय, विष पीकर जग तार। दुखियों के तुम मित्र हो, भक्तों के आधार॥
चन्द्र मुकुट शीतल करे, तीसरा नयन प्रखर। अज्ञान तम हर ले प्रभु, भर दे ज्ञान सुधाकर॥
कैलाशपति भोलेनाथ, दीनों के रखवार। एक तुम्हारा नाम ही, भवसागर का पार॥
जब-जब मन भ्रमित हुआ, तुमने दिया प्रकाश। तेरे चरणों में मिले, जीवन का विश्वास॥
न धन चाहूँ, न मान चाहूँ, न चाहूँ जग की रीति। बस शिव-शिव जपता रहूँ, यही रहे मेरी प्रीति॥
हर हर महादेव!
जय शिव शंकर, त्रिपुरारी, विश्वनाथ भगवान। तेरी कृपा से ही सदा, मंगलमय हो प्राण॥
प्रगति मिश्रा

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