संघर्ष ही मेरा पथ है
जब राहों में काँटे बिछ जाएँ, तब रुकना मेरा काम नहीं,
आँधी चाहे कितनी भी आए, झुक जाना मेरा नाम नहीं।
पर्वत जैसी बाधाएँ हों, या सागर जितनी गहराई हो,
मन में यदि विश्वास अटल हो, हर मुश्किल पर चढ़ाई हो।
ठोकर खाकर गिर जाना तो जीवन की एक कहानी है,
गिरकर फिर से उठ खड़ा होना ही सच्ची वीरता की निशानी है।
जब अंधकार घना हो जाए, आशा का दीप जलाना है,
हार नहीं स्वीकार कभी, बस आगे कदम बढ़ाना है।
समय परीक्षा लेता है, हर पल हमें परखता रहता है,
जो संघर्षों से न घबराए, वही सफलता कहता है।
सपनों की कीमत चुकानी है, श्रम का पथ अपनाना होगा,
भाग्य नहीं, पुरुषार्थ के बल पर मंजिल को पाना होगा।
यदि जग सारे द्वार बंद कर दे, साहस नया बनाना है,
अपने भीतर की शक्ति को पहचान कर आगे जाना है।
नदियाँ भी चट्टानों से टकराकर अपना मार्ग बनाती हैं,
संघर्षों की अग्नि में तपकर ही स्वर्ण-सी चमक पाती हैं।
जीवन का संदेश यही है— मत भय से कभी हारो तुम,
अपने हौसलों के बल पर हर बाधा को ललकारो तुम।
एक दिन ऐसा भी आएगा, जब मंजिल चरण चूमेगी,
आज की तपती धूप तुम्हारे कल की छाया बनेगी।
चलते रहो निरंतर पथ पर, चाहे कितनी रात घनेरी हो,
साहस, श्रम और दृढ़ विश्वास से हर जीत तुम्हारी हो।
✍️ लेखक – प्रगति मिश्रा

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