खामोश अभी भी तुम हो

खामोश अभी भी तुम हो, 
खामोश अभी भी मैं हु, 
अंदाज निराले हैं तेरे,
 यह जो नैन कजरारे तेरे, 
तेरे होठों की बात कहूं मैं क्या, 
जिसे आगे खाली हर मधुशाला के प्याले, 
अंदाज़ तेरा यूं ही निराले, 
तेरी मद भरी निगाहों में डूब के मतवाला हो जाऊं, 
देख अंदाज तेरे निराले मदहोश में होता जाऊँ , 
तेरी अल्हड़ सी जवानी पर मैं बनके भंवरा मंडराता हु,
बलखा कर चलना तेरा मुझ को भा जाता है,
 अंदाज निराला तेरा चैन मेरा ले कर जाता है, 
खामोश अभी भी तुम हो,  
खामोश अभी मैं भी हूं ,
जो चाहत है  मेरे दिल में तेरी यह ,
ना तेरी जुबान कुछ कहती, 
ना मेरी जुबान कुछ कहती है, 
अंदाज निराले तेरे मेरे दिल को यह तड़पाते हैं, 
मिलने तुझसे हम कोसो चल के आते हैं,
 मेरे दिल का सुकून लेकर गई यह नैन नशीले तेरे,
गुम शुम से बैठे रहते है सोच के हसी ठिठोली तेरी, 


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