हां मैं लेखक और तुम मेरी रचना हो
बेशक मैं एक लेखक हूं,
मेरी लिखी हर रचना की हर लाइन में तुम हो,
मेरे ख्यालों की रचना तुम हो ,
मेरे जज्बातों की आत्मा तुम हो,
मैं हूं लेखक और तुम मेरी रचना,
जो बयान न कर पाऊं मैं जुबान से,
नजरों से जो दिख जाए वह भावना हो तुम,
हां मैं लेखक और तुम मेरी रचना हूं,
मेरे जीवन रूपी किताब की हर एक पन्ने में,
लिखी हुई सारी रचनाओं की अंतरात्मा हो तुम,
सुख-दुख की बानी जीवन की हर एक कहानी हो,
हां मैं लेखक हूं और तुम मेरी रचना हो,
मेरे जीवन की आस हो ,
मेरी लिखी हर एक रचना कि तुम प्रकाश हो,
मैं हूं जीवन और तुम उसका आत्मविश्वास हो,
हां मैं लेखक और तुम मेरी रचना हो,
जीवन में पड़े जरूरत जो उस जीवन का पन्ना हो,

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