ना जाने कितनी तलक
ना जाने कितनी तलक हदें पार की मैंने तेरे लिए,
आज तू ही मुझे हद में रहना सिखा रही है,
तेरे इश्क में क्या गलत क्या सही इसका अंदाजा ना था,
तु मिलेगी मुझे कैसे इस बात का पता न था,
ना जाने कितने रुठे तेरे खातिर ना जाने कितने छूटे तेरे खातिर.
तुझ से करके इश्क बेइंतहा,
हर हद को मैंने तोड़ दिया,
तेरे खातिर इस दुनिया से लड़ कर ,

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