रात यादों मे गुजर जाती हैं

रात बाहों मे भर कर 
सुबह सुबह गुम हो जाती हो 
आंख खुलते ही 
फिर तुम कितनी याद आती हो 
हम बिस्तर मे पडी सिलवटो 
से लिपट कर महक ढुंढते हे तुम्हारी 
तुम खवाब से हकिकत कयो नही बन जाती हो

Comments

Popular Posts