कुछ ख्वाब संजो के
कुछ ख्वाब संजो के ,
अपनी हसी को पीरो के,
चल साँझ की तरह ढल जाए,
आ अधरों को सजा कर ,
फिर घायल कर जाए ,
नैनो से चल बात करे ,
कुछ तू कह,
और हम उसको समझ जाए,
रात की शीतलता को अपना कर ,
दिया चांद को बनाकर,
बैठ समंदर किनारे,
आ एक दूजे में खो जाए,
अरमानों की लहर दिल में हिचकोले खाए
चल एक दूजे में खो जाए ,

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