एक ख्वाब सजाया था

एक ख्वाब सजाया था मैंने तुझको लेके,
 जीवन को मैंने अपने रंगीन बनाया था तुझको लेके,
पर ना जाने क्यों तू रुठी रुठी रहा करती है,
मेरे ख्वाबों की दुनिया में तो तू हीं दिखा करती है,

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