हकीकत
आज कल आईने में भी अक्स बदलने लगे ,
मासूम से नज़र आने वाले सक्स शातिर कारनामे करने लगे
कभी हैरान होने का एक नया कारनामा हो जाता ,
परेशान सा प्रशासन लाचार नजर आता है।
कही रोती है मासूमियत एकांत में बैठ कर ,
हसते सैतान झुण्ड में बैठ कर ,
कभी था भारत हमारा महान ,
आज कल यह भी बदनाम होने लगा है ,
राजा ही प्रजा की लूटने लगा है ,
भरोसा करे किस पर रखवाल ही चोरी करने लगा।
लेखक : प्रगति मिश्रा
मासूम से नज़र आने वाले सक्स शातिर कारनामे करने लगे
कभी हैरान होने का एक नया कारनामा हो जाता ,
परेशान सा प्रशासन लाचार नजर आता है।
कही रोती है मासूमियत एकांत में बैठ कर ,
हसते सैतान झुण्ड में बैठ कर ,
कभी था भारत हमारा महान ,
आज कल यह भी बदनाम होने लगा है ,
राजा ही प्रजा की लूटने लगा है ,
भरोसा करे किस पर रखवाल ही चोरी करने लगा।
लेखक : प्रगति मिश्रा

Comments
Post a Comment