मानवता
होती नहीं कीमत आज कल मानवता की ,
सजगता नहीं आज कल के माहौल की ,
कोई लड़ता जिनदगी के इस तूफान से ,
कोई झगड़ता है वक़्त केस नादाँ तूफान से ,
पठालो के इस सहर में इंसानियत नहीं दिखाती ,
हर सखस परेशान सा नज़र आता है ,
वक़्त के इस भीड़ में , किसी कोप कीमत का मोल नहीं
कोई करता वक़्त की कीमत ही नहीं ,
कर जाते बदनाम मासूमियत को ,

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