सुना है बहुत
सुना है बहुत कुछ तेरे बारे मे,
पर मैं तुझसे ये बताऊ कैसे,
मरता हू मैं तेरी हर एक अदा पे,
पर हम तुझसे ये जताए कैसे,
पहले हम ढूंढ़ते थे बहाने मिलने के,
ढूंढ़ते रहते थे रास्ते दिल की बात कहने के,
थे अरमान कई तुझको पाने के,
खो के तेरी चाहत में जिंदगी बिताने के,
आज भी नज़रे ढूँढ़ती है तुझे पाने को,
ये जिंदगी संग तेरे बिताने को,
रख कर सो जाऊँ तेरी गोद में,
बस ताउम्र रहु इसी ख़यालों में,
तेरी हर बात को दिल से लगाते थे,
सोच के उन बातों को खो जाया करते थे,
हम तो खुश हो जाया करते थे
देख कर तेरी शरारत और हसी को,
हाँ जो भी सुना था सच सुना था ,
मेने तेरे बारे मे पर बता न पाया ,
मोहब्बत सबसे ज्यादा की थी,
पर कभी कह न पाया तुझसे,

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